Thursday, September 15, 2016

विधवा विवाह सच्चे धर्म का एक मुख्य आदेश है

    वास्तव में परमेश्वर विधवा नारी को भी कुमारी की तरह विवाह करने की अनुमति और आज्ञा देता है। जो उसके विवाह को रोकते हैं, ऐसे पापियों को परमेश्वर परलोक में दण्ड देने चेतावनी देता है। दुनिया में पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता। इसलिए दुनिया से जाने के बाद तो अवश्य ही न्याय होना चाहिए। यह मनुष्य स्वभाव की अनिवार्य माँग है। क़ुरआन बताता है कि परलोक में न्याय होगा और परमेश्वर समाज के ज़ालिम चैधरियों को उनके समर्थकों समेत दहकती हुई आग में डालेगा। जहां वे अनन्त काल तक जलते रहेंगे। उन्हें ऐसा शरीर दिया जाएगा, जिससे वे उस कष्ट को और ज़्यादा महसूस करें। जब उनकी खाल जल जाएगी तो नई खाल उसकी जगह ले लेगी। वे जलते रहेंगे लेकिन वे कभी मरेंगे नहीं। उन्हें खाने के लिए काँटेदार झाड़ियाँ और पीने के लिए पीप और लहू दिया जाएगा।
    ‘उन्होंने फै़सला चाहा और प्रत्येक सरकश, दुराग्रही असफल होकर रहा। वह जहन्नम से घिरा है और पीने को उसे कचलहू का-सा पानी दिया जाएगा, जिसे वह कठिनाई से घूँट-घूँट करके पिएगा और ऐसा नहीं लगेगा कि वह आसानी से उसे उतार सकता है और मृत्यु उसपर हर ओर से चली आती होगी, फिर भी वह मरेगा नहीं। और उसके सामने कठोर यातना होगी।’ (क़ुरआन, 14,15-17)
    स्वामी जी ने अनुचित रूप से क़ुरआन की इस न्याय व्यवस्था का मज़ाक़ उड़ाया है और मनुस्मृति की प्रशंसा करते हुए कहा है कि
    ‘यह तो पोपाबाई का न्याय ठहरा।...न्याय तो वेद और मनुस्मृति का देखो जिसमें क्षण मात्र भी विलम्ब नहीं होता और अपने अपने कर्मानुसार दण्ड वा प्रतिष्ठा सदा पाते रहते हैं।’ (सत्यार्थप्रकाश, 14वाँ समुल्लास, पृ.385)
    आवागमन को न मानने वाले मुसलमान और ईसाई भारत में आए तो हिन्दू विधवाओं को पुनर्विवाह का हक़ मिला। विधवा के संबंध में वेद और मनुस्मृति की न्याय व्यवस्था को सनातनी हिन्दुओं और आर्य समाजियों ने, सबने मिलकर त्याग दिया है। आज इस तरह के नियमों पर चलना क़ानूनी रूप से भी प्रतिबंधित है।

-- --Book Download Link-Midiafire.com-
http://www.mediafire.com/download/ydp77xzqb10chyd/swami-dayanand-ji-ne-kiya-khoja-kiya-paya-second-edition.pdf --
डा. अनवर जमाल की पुस्तक "'स्वामी दयानंद जी ने क्या खोजा? क्या पाया?" परिवर्धित संस्करण  PDF इधर से भी डाउनलोड की जा सकती है --पुस्तक में108 प्रश्न नंबर ब्रेकिट में दिये गए हैं
https://archive.org/stream/swami-dayanand-ji-ne-kiya-khoja-kiya-paya-published-book/swami-dayanand-ji-ne-kiya-khoja-kiya-paya-second-edition#page/n0/mode/2up
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पुस्तक युनिकोड में चार पार्ट में इधर भी है
 http://108sawal.blogspot.in/2015/04/swami-dayanand-ne-kiya-khoja-kiya-paya.html

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